Thursday, May 19, 2016

कैसे मिला लाहुल-स्पिति को जनजातीय दर्जा,
इतिहास के कुछ पन्‍ने मेरी डायरी से

---(राहुल देव लरजे) 


            भारत का संविधान लागू होने के उपरान्त सं 1952 में आज़ाद भारत में प्रथम चुनाव किए गए। लाहुल को पंजाब राज्य के कुल्लू संविधान क्षेत्र में रखा गया और 26 जनवरी का दिन वोट देने का दिन निश्चित किया गया। समस्त लाहुल वासियों के लिए कुल्लू के वशिष्ठ व स्पीति वासियों के लिए क्लाथ को पोलिंग स्टेशन बनाया गया। जैसा कि सर्दियों में जनवरी माह में बर्फबारी के कारण स्वाभाविक तौर पर बंद रहता है ,इसलिए चुनाव तिथि जनवरी माह में होने की वजह से लाहुल स्पीति के लोगों में बेहद निराशा थी।  उस समय कुल्लू पहुंचने के दोनों रास्ते जो कि रोहतांग और कुंजुम दर्रे थे,दोनों  शीतकाल में बर्फबारी की वजह से बंद थे।



Lahulians casting their votes
                                    ठीक इसी वर्ष जाहलमा गांव के लाहौर में शिक्षित युवा श्री शिव चंद ठाकुर और वरगुल के श्री देवी सिंह ठाकुर ने गलत समय में चुनाव कराए जाने की वजह से समस्‍त लाहौल वासियों को इन राष्‍ट्रीय चुनावों का बहिष्‍कार करने का आग्रह किया।23 मार्च 1952 को लाहौल-स्पिति वासियों के लिए चुनाव का दिन चुनने का निर्णय लिया।किन्‍तु यहां की जनता ने इस तिथि का भी घोर विरोध किया।ततपश्‍चात पंजाब राज्‍य सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने स्थि‍ति का जायजा लेने का निर्णय लिया।
Thakur Devi Singh(Extreme left) & Thakur Shiv Chand(Extreme Right)
इन चुनावों के विरोध में कई जगह जूलूस भी निकाले गए।अन्‍ततःभारत सरकार ने जायज मांग को स्‍वीकार करते हुए पुनः

            अतःलाहौल के जनता के कुछ प्रतिनिधियों के दल को दिल्‍ली से बुलावा आया।ठाकुर देवी सिंह एवं शिव चंद ठाकुर तुरन्‍त दिल्‍ली रवाना हुए और वहां तत्‍कालीन प्रधानमन्‍त्री पंण्डित जवाहर लाल नेहरू,रक्षा मन्‍त्री सरदार वल्‍लभ भाई पटेल एवं कानून मन्‍त्री बी.आर.अम्‍बेदकर से मिले और उन्‍हें लाहौल-स्पिति की समस्‍या से अवगत कराया।उचित समय देखते हुए इन्‍होनें लाहौल-स्पि‍ति को संवेधानिक तौर पे जनजातीय दर्जा देने की मांग रख दी।

       प्रधानमन्‍त्री नेहरू ने स्‍िथ्‍ाति का वास्‍तविक जायजा लेने के लिए अपने निजी नुमायदे श्रीकान्‍त को लाहौल्‍ा भेजने का निर्णय लिया।जब श्री कान्‍त लाहौल पहुंचे तो वहां के पिछडेपन से रूबरू हुए।उन्‍होने देखा कि समस्‍त इलाके में सडक,बिजली और अस्‍पताल भी मुहया नहीं हुए थे।उन के अनुसार उस समय समस्‍त लाहौल घाटी में मात्र 4 स्‍कूल उपलब्‍ध थे।लाहौल की जनता ने उपयुक्‍त समय देखते हुए उन से एक अलग जनजातीय परिषद की मांग भी उन के समक्ष रख दी।

Mape of lahul-Spiti
             अपनी लाहौल यात्रा के पश्‍चात श्रीकान्‍त ने अपनी रिपोर्ट दिल्‍ली में भारत सरकार को सौंप दी।अन्‍ततःसन 1956 में अनुसूचित जनजातीय अधिनियम संशोधन के द्वारा भारत सरकार ने लाहौल-स्पिति को जनजातीय जिला घोषित कर दिया।इस के 4 वर्ष के पश्‍चात सन 1960 में इसे पंजाब राज्‍य के एक पृथक जिले का दर्जा दिया गया।इस से पूर्व य‍ह कुल्‍लू जिले का एक तहसील मात्र था।

      सन 1966 के पंजाब पुर्नगठन अधिनियम के द्वारा पुनःलाहौल-स्पिति को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दोहराया गया और यह हिमाचल राज्‍य का एक सम्‍पूर्ण हिस्‍सा बना।इस के पश्‍चात सन 1971 में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्‍य का दर्जा मिलने से सन 1975 में चम्‍बा लाहौल का क्षेत्र जिस में उदयपुर से तिंदी तक का इलाका आता था,को भी लाहौल में जोड दिया गया।ततपश्‍चात लाहौल जिला को भारतीय संविधान के समय-समय के जनजातीय आदेशों के तहत एवं अनुसूची 342(1) के अनुसार जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिया जाता रहा है।

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